Latest News

728*90
दलहनी फसलें लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
दलहनी फसलें लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

तोरिया की खेती

परिचय

तोरिया खरीफ एवं रबी के बीच शीघ्र प्राप्त होने वाली तिलहनी फसलो में आती हैI इसकी खेती सीमित सिंचाई की दशा में अधिक लाभदायक होती हैI उन्नत विधिया अपनाने पर उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि की जा सकती हैI

जलवायु और भूमि

तोरिया की खेती के लिए किस प्रकार की जलवायु एवं भूमि की आवश्यकता होती है?
तोरिया की फसल के लिए 25 डिग्री सेंटीग्रेट से 30 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान की आवश्यकता होती हैI तोरिया की फसल के लिए दोमट भूमि सर्वोत्तम होती है जिसमे जल निकास का उचित प्रबंध होना चाहिएI

प्रजातियाँ

उन प्रमुख प्रजातियों के बारे में जानकारी हो जाए जो तोरिया की फसल बोते समय हमें प्रयोग करनी है?
तोरिया की फसल के लिए उन्नतशील प्रजातियों का चयन करना चाहिए जैसे की टाइप 9, भवानी, पी.टी.303 तथा पी.टी.30 की बुवाई समय पर करनी चाहिएI

खेत की तैयारी

तोरिया की खेती के लिए खेतों की तैयारी किस प्रकार से करे?
तोरिया की फसल की बुवाई से पहले खेत की तैयारी में सबसे पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से तथा दो-तीन जुताइयां देशी हल या कल्टीवेटर से करके पाटा लगाकर मिट्टी को भुरभुरा बना लेना चाहिएI

बीज बुवाई

बीजोपचार कब करे और किस प्रकार करे?
तोरिया की फसल को बीज जनित रोगो से बचाव के लिए बीज को 2.5 ग्राम थीरम नामक रसायन से प्रति किलोग्राम अथवा 3 ग्राम मेन्कोजेब नामक रसायन को प्रति किलोग्राम बीज में मिलाकर बीज उपचारित करने के बाद ही बीज की बुवाई करनी चाहिएI
तोरिया की बुवाई के लिए प्रति हेक्टेयर कितने बीज की आवश्यकता होती है?
तोरिया की फसल के लिए बीज की मात्रा 4 से 5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से बुवाई करने के लिए उपयुक्त होती हैI
तोरिया की बुवाई कब करे और किस प्रकार से करे?

किसान भाइयो तोरिया की बुवाई सितम्बर माह के प्रथम सप्ताह से सितम्बर माह के चौथे सप्ताह तक कर देना चाहिए फसल की बुवाई देशी हल से 30 सेंटीमीटर की दूरी पर 3 से 4 सेंटीमीटर की गहराई पर कतारों में करने के पश्चात पाटा लगाकर बीज को ढक देना चाहिएI

पोषण प्रबंधन

तोरिया की खेती में उर्वरको का प्रयोग हम किस प्रकार करे?
तोरिया फसल की असिंचित दशा में बुवाई करने पर नाइट्रोजन 50 किलोग्राम, फास्फोरस 30 किलोग्राम तथा पोटाश 30 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करना चाहिए एवं सिंचित दशा में नाइट्रोजन 80 किलोग्राम, फास्फोरस 50 किलोग्राम तथा पोटाश 50 किलोग्राम तत्व के रूप में प्रयोग करना चाहिएI फास्फोरस एवं पोटाश की पूरी मात्रा एवं नत्रजन की आधी मात्रा अंतिम जुताई के समय बीज से 2 - 3 सेंटीमीटर नीचे प्रयोग करे तथा शेष आधी नाइट्रोजन की मात्रा को बुवाई के 20 से 25 दिन बाद टापड्रेसिंग के रूप में देना चाहिएI

जल प्रबंधन

तोरिया की फसल में सिंचाई कब करनी चाहिए?
तोरिया की फसल में फूल निकलने से पूर्व की अवस्था जल की कमी के प्रति विशेष संवेदनशील फसल है अतः फसल की अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए फूल निकलने से पूर्व एक सिंचाई करना अति आवश्यक हैI

खरपतवार प्रबंधन

तोरिया की फसल में खरपतवारों का नियंत्रण हमारे किसान भाई किस प्रकार से करे?
किसान भाइयो तोरिया की बुवाई के 15 दिन बाद घने पौधों को निकालकर पौधों की आपस की दूरी 10 से 15 सेंटीमीटर कर देना चाहिए तथा खरपतवार नष्ट करने के लिए निराई गुड़ाई कर देना चाहिएI यदि खरपतवार अधिक है तो पेंडामेथलीन 30 ई.सी. नामक रसायन की 3.3 लीटर मात्रा को 800 से 1000 लीटर पानी में घोलकर बुवाई के 12 से 36 घंटे के अंदर जमाव के पहले छिड़काव करना चाहिएI

रोग प्रबंधन

तोरिया की फसल में कौन कौन से प्रमुख रोग लगाने की सम्भावना होती है और उनका नियंत्रण हमारे किसान भाई किस प्रकार करे?
तोरिया की फसल में झुलसा रोग का प्रकोप होने पर पत्तियो तथा फलियों पर कत्थई रंग के धब्बे बनाते है इनके उपचार के लिए मेन्कोजेब 75 % की 2 किलोग्राम मात्रा अथवा कापर आक्सीक्लोराइड 80% की 3 किलोग्राम मात्रा को प्रति हेक्टेयर की दर से 800 से 1000 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए तथा फसल में सफ़ेद गेरुई रोग एवं तुलसिता रोग के नियंत्रण के लिए रोडोमिल एम्.जेड. 72 की 2.5 किलोग्राम मात्रा को प्रति हेक्टेयर की दर से 800 से 1000 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिएI

कीट प्रबंधन

तोरिया की फसल में कौन-कौन से प्रमुख कीट लगते है और उनके नियंत्रण के लिए हमारे किसान भाई क्या करे?
किसान भाइयो तोरिया की फसल के प्रमुख कीट जैसे सरसों की आरा मक्खी, चित्रिल कीट तथा बालदार सूंडी प्रमुख कीट है जो तोरिया की फसल को हानि पहुचते है फसल को इन कीटो से बचाव के लिए मैलाथियान 50 ई.सी. रसायन की 1.5 लीटर मात्रा या फैंटोथियान 50 ई.सी. रसायन की 1 लीटर मात्रा या डायमिथोयेट 30 ई.सी.की 1 लीटर मात्रा को 700 से 800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिएI

फसल कटाई

तोरिया की फसल की कटाई हमारे किसान भाई कब करे और उसके जो बीजों का भण्डारण है वह किस प्रकार सुरक्षित करे ?
तोरिया की फसल में जब 75 % फलियां सुनहरे रंग की हो जाये तो फसल की कटाई करके सुखाने के पश्चात मड़ाई करके बीज को अलग कर लेना चाहिए तथा बीज को अच्छी तरह सुखाकर ही भण्डारण करना चाहिएI

पैदावार

तोरिया की फसल से प्रति हेक्टेयर कितनी उपज प्राप्त होने की सम्भावना होती है?

तकनीकी तरीके से उगाई गयी तोरिया की फसल से उपज 10 से 15 कुंतल प्रति हेक्टेयर तक प्राप्त की जा सकती हैI 

सूरजमुखी की खेती


परिचय

सूरजमुखी की खेती खरीफ, रबी, एवं जायद तीनो ही मौसम में की जा सकती है, लेकिन खरीफ में इस पर अनेक रोगों एवं कीटो का प्रकोप होने के कारण फूल छोटे होते है, तथा दाना कम पड़ता हैI जायद में सूरजमुखी की अच्छी उपज प्राप्त होती हैI इस कारण जायद में ही इसकी खेती ज्यादातर की जाती हैI

उपयुक्त भूमि

सूरजमुखी की खेती के लिए किस प्रकार की जलवायु और भूमि की आवश्यकता पड़ती है?
सूरजमुखी की खेती खरीफ रबी जायद तीनो मौसम में की जा सकती हैI फसल पकते समय शुष्क जलवायु की अति आवश्यकता पड़ती हैI सूरजमुखी की खेती अम्लीय एवम क्षारीय भूमि को छोड़कर सिंचित दशा वाली सभी प्रकार की भूमि में की जा सकती है, लेकिन दोमट भूमि सर्वोतम मानी जाती हैI

प्रजातियाँ

उन्नतशील प्रजातियाँ कौन कौन सी होती है, जिन्हें हमें खेत में बोना चाहिए?
इसमे मख्य रूप से दो प्रकार की प्रजातियाँ पायी जाती हैI एक तो सामान्य या संकुल प्रजातियाँ इसमे मार्डन और सूर्य पायी जाती हैI दूसरा संकर प्रजातियाँ इसमे के बी एस एच-1 और एस एच 3322 एवं ऍफ़ एस एच-17 पाई जाती है

खेत की तैयारी

सूरजमुखी की फसल के लिए खेतो की तैयारी हमारे किसान भाई किस प्रकार करें?
खेत की तयारी में जायद के मौसम में प्राप्त नमी न होने पर खेत को पलेवा करके जुताई करनी चाहिएI एक जुताई मिटटी पलटने वाले हल से तथा बाद में 2 से 3 जुताई देशी हल या कल्टीवेटर से करनी चाहिए मिटटी भुरभुरी कर लेना चाहिए, जिससे की नमी सुरक्षित बनी रह सकेI

बीज बुवाई

बुवाई का सही समय क्या है और किस विधि से ये बोये जाते है?
जायद में सूरजमुखी की बुवाई का सर्वोत्तम समय फरवरी का दूसरा पखवारा है इस समय बुवाई करने पर मई के अंत पर जून के प्रथम सप्ताह तक फसल पक कर तैयार हो जाती है, यदि देर से बुवाई की जाती है तो पकाने पर बरसात शुरू हो जाती है और दानो का नुकसान हो जाता है, बुवाई लाइनों में हल के पीछे 4 से 5 सेंटीमीटर गहराई पर करनी चाहिएI लाइन से लाइन की दूरी 45 सेंटी मीटर तथा पौध से पौध की दूरी 15 से 20 सेंटीमीटर रखनी चाहिएI
सूरजमुखी की बुवाई में प्रति हेक्टयर बीज की कितनी मात्रा लगती है, और इनका शोधन हमारे किसान भाई किस प्रकार करे?
बीज की मात्रा अलग अलग पड़ती है, जैसे की संकुल या सामान्य प्रजातियो में 12 से 15 किलो ग्राम प्रति हैक्टर बीज लगता है और संकर प्रजातियो में 5 से 6 किलो ग्राम प्रति हैक्टर बीज लगता हैI यदि बीज की जमाव गुणवता 70% से कम हो तो बीज की मात्रा बढ़ाकर बुवाई करना चाहिए, बीज को बुवाई से पहले 2 से 2.5 ग्राम थीरम प्रति किलो ग्राम बीज को शोधित करना चाहिएI बीज को बुवाई से पहले रात में 12 घंटा भिगोकर सुबह 3 से 4 घंटा छाया में सुखाकर सायं 3 बजे के बाद बुवाई करनी चाहिए जायद के मौसम में I

पोषण प्रबंधन

सूरजमुखी की फसल में उर्वरको का प्रयोग कितनी मात्रा में करनी चाहिए और कब करना चाहिए?
सामान्य उर्वरको का प्रयोग मृदा परिक्षण के आधार पर ही करनी चाहिए फिर भी नत्रजन 80 किलोग्राम, 60 किलोग्राम फास्फोरस एवम पोटाश 40 किलो ग्राम तत्व के रूप में प्रति हेक्टेयर पर्याप्त होता हैI नत्रजन की आधी मात्रा एवम फास्फोरस व् पोटाश की पूरी मात्रा बुवाई के समय कुडों में प्रयोग करना चाहिए इसका विशेष ध्यान देना चाहिए शेष नत्रजन की मात्रा बुवाई के 25 या 30 दिन बाद ट्राईफ़ोसीड के रूप में देना चाहिए यदि आलू के बाद फसल ली जाती है तो 20 से 25% उर्वरक की मात्र कम की जा सकती है, आखिरी जुताई में खेत तैयार करते समय 250 से 300 कुंतल सड़ी गोबर की खाद या कम्पोस्ट खाद लाभदायक पाया गया हैI

जल प्रबंधन

सूरजमुखी की फसल में सिचाई कब और कैसे करनी चाहिए?
पहली सिचाई बुवाई के 20 से 25 दिन बाद हल्की या स्प्रिकलर से करनी चाहिएI बाद में आवश्यकतानुसार 10 से 15 दिन के अन्तराल पर सिचाई करते रहना चाहिएI कुल 5 या 6 सिचाइयो की आवश्यकता पड़ती हैI फूल निकलते समय दाना भरते समय बहुत हल्की सिचाई की आवश्यकता पड़ती हैI जिससे पौधे जमीन में गिरने न पाए क्योकि जब दाना पड जाता है तो सूरजमुखी के फूल के द्वारा बहुत ही पौधे पर वजन आ जाता है जिससे की गिर सकता है गहरी सिचाई करने सेI

कीट प्रबंधन

सूरजमुखी की फसल में फसल सुरक्षा हमारे किसान भाई किस प्रकार करें?
सूरजमुखी में कई प्रकार के कीट लगते है जैसे की दीमक हरे फुदके डसकी बग आदि हैI इनके नियंत्रण के लिए कई प्रकार के रसायनो का भी प्रयोग किया जा सकता हैI मिथाइल ओडिमेंटान 1 लीटर 25 ई सी या फेन्बलारेट 750 मिली लीटर प्रति हैक्टर 800 से 1000 लीटर पानी में घोलकर छिडकाव करना चाहिएI

फसल कटाई

सूरजमुखी की फसल की कटाई और मड़ाई करने का सही समय क्या है कब करनी चाहिए?
जब सूरजमुखी के बीज कड़े हो जाए तो मुन्डको की कटाई करके या फूलो के कटाई करके एकत्र कर लेना चाहिए तथा इनको छाया में सुख लेना चाहिए इनको ढेर बनाकर नहीं रखना चाहिए इसके बाद डंडे से पिटाई करके बीज निकल लेना चाहिए साथ ही सूरजमुखी थ्रेशर का प्रयोग करना उपयुक्त होता हैI

पैदावार

फसल प्राप्त होने के पश्चात उसका भण्डारण हम किस प्रकार करें?
बीज निकलने के बाद अच्छी तरह सुख लेना चाहिए बीज में 8 से 10% नमी से आधिक नहीं रहनी चाहिएI बीजो से 3 महीने के अन्दर तेल निकल लेना चाहिए अन्यथा तेल में कड़वाहट आ जाती है, अर्थात पारिस्थिकी के अंतर्गत भंडारण किया जा सकता हैI
सूरजमुखी की फसल से कितनी पैदावार प्राप्त हो जाती है?

दोनों तरह की प्रजातियों की पैदावार अलग- अलग होती हैI संकुल या सामान्य प्रजातियों की पैदावार 12 से 15 कुन्तल प्रति हैक्टर होती है तथा संकर प्रजातियों की पैदावार 20 से 25 कुन्तल प्रति हैक्टर प्राप्त होती हैI

सोयाबीन की खेती

परिचय

सोयाबीन की खेती मैदानी क्षेत्रों में अभी हाल में ही कुछ वर्षो से शुरू हुई है। इसमे 40 से 50 प्रतिशत प्रोटीन तथा 20 से 22 प्रतिशत तक तेल की मात्रा पाई जाती है। इसके प्रयोग से शरीर को प्रचुर मात्रा में प्रोटीन मिलती है। प्रदेश के बुंदेलखंड के सभी जनपदों एवम बदाऊ, रामपुर, बरेली, शाहजहांपुर, मेरठ आदि जिलो में इसकी खेती सफलतापूर्वक की जाती है।

जलवायु और भूमि

सोयाबीन की खेती के लिए किस प्रकार की जलवायु और भूमि की आवश्यकता होती है?
सोयाबीन की खेती के लिए गर्म तथा तर जलवायु होना चाहिए। इसकी खेती लिए सबसे उत्तम भूमि दोमट होती है लेकिन बुंदेलखंड की सभी प्रकार की भूमि में सफलतापूर्वक इसकी खेती की जा सकती है।

प्रजातियाँ

सोयाबीन की कौन-कौन सी उन्नतशील प्रजातियाँ पाई जाती है?
इसमे बहुत सी प्रजातियाँ पाई जाती है जैसे की- पी. के. 772, 262, 416, पी. एस. 564, 1024, 1042, जे.एस. 71-5, 93-5, 72-44, 75-46, जे.एस.2, 235, पूसा16, 20 ऍम ए यू एस46 एवं 37 प्रजाति है।

खेत की तैयारी

सोयाबीन की फसल उगाने के लिए अपने खेतों की तैयारी हम किस प्रकार करे बताईये?
खेत की पहली जुताई गर्मियों में मिट्टी पलटने वाले हल से गहरी करनी चाहिए जिससे हानिकारक कीड़े-मकोड़े आदि ख़त्म हो जावे और गोबर की सड़ी खाद 100 से 150 कुंतल प्रति हेक्टेयर मिला देनी चाहिए। दो-तीन जुताई कल्टीवेटर से करने के पश्चात खेत को भुरभुरा बना लेना चाहिए।

बीज बुवाई

बुवाई हेतु बीज की मात्रा कितनी निर्धारित होनी चाहिए और बीजो का शोधन हमारे किसान भाई किस प्रकार करे?
बुवाई वाले बीज का अंकुरण 75 से 80 प्रतिशत से कम नहीं होना चाहिए। ऐसे बीज की मात्रा 75 से 80 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर लगती है। बीजोपचार हेतु बीज को बुवाई से पहले प्रति किलोग्राम बीज को 2 ग्राम थीरम या 1 ग्राम कार्बेन्डाजिम 50 प्रतिशत घुलनशील चूर्ण के मिश्रण से शोधित कर लेना चाहिए या थायोफिनेट मिथायल 1.5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से शोधित करना चाहिए जिन खेतों में सोयाबीन की खेती पहली बार या काफी समय बाद बोया जा रहा है वहां पर बीज को राईजोबियम कल्चर से भी उपचारित करना चाहिए। एक पैकेट कल्चर को 10 किलोग्राम बीज के उपचारित या ऊपर से छिड़ककर हाथ से हलके मिलाये जिससे की बीज के ऊपर एक हल्की परत बन जाए एस बीज की बुवाई तुरंत कर देनी चाहिए। तेज धूप से बचाव करना अति आवश्यक है तेज धूप से जीवाणु मरने की आशंका रहती है।
सोयाबीन की बुवाई का सही समय और विधि क्या है और किस तरह से इस्तेमाल हमारे किसान भाई करे?
मैदानी क्षेत्रों में बुवाई का उचित समय 20 जून से 10 जुलाई तक है बुवाई लाईनों में करनी चाहिए। लाइन से लाइन की दूरी 45 सेंटीमीटर तथा पौधे से पौधे की दूरी 3 से 5 सेंटीमीटर रखनी चाहिए। बीज को 3 से 4 सेंटीमीटर की गहराई पर बुवाई करनी चाहिए इसकी बुवाई अधिक गहरी नहीं करनी चाहिए।

पोषण प्रबंधन

सोयाबीन की फसल में खाद और उर्वरक का प्रयोग हमें कितनी मात्रा में करना चाहिए, कब करना चाहिए और किस प्रकार से करना चाहिए?
उर्वरको का प्रयोग मृदा परीक्षण की संस्तुतियों के आधार पर किया जाना चाहिए। यदि मृदा परीक्षण नहीं कराया गया है तो उन्नतशील प्रजातियों के लिए नत्रजन 20 किलोग्राम, फास्फोरस 80 किलोग्राम तथा पोटाश 40 किलोग्राम तत्व के रूप में प्रति हेक्टेयर प्रयोग करना चाहिए। खाद की पूरी मात्रा अंतिम जुताई में हल के पीछे 6 से 7 सेंटीमीटर की गहराई पर डालनी चाहिए बुवाई के 30 -35 दिन बाद सोयाबीन के कुछ पौधे उखाड़कर देखना चाहिए की जड़ों में ग्रंथियां बनी है या नहीं यदि ग्रंथियां न बनी हो तो 30 किलोग्राम नत्रजन की मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से फूल आने के एक सप्ताह पहले फसल में डालना चाहिए। 200 किलोग्राम जिप्सम का भी प्रयोग करना चाहिए जिससे उपज अच्छी प्राप्त हो सके।

जल प्रबंधन

फसल में सिंचाई हमें कब करनी चाहिए उसका सही समय क्या है?
सोयाबीन की फसल वर्षा पर आधारित है यदि वर्षा न हो तो फूल एवम फली आने पर सिंचाई करना अति आवश्यक है। यदि वर्षा का पानी खेत में अधिक भर जाता है तो पानी को निकलने का प्रबंध करना अति आवश्यक है नहीं तो फसल पर कुप्रभाव पड़ता है इससे पैदावार कम होने की संभावना बढ़ जाती है।

खरपतवार प्रबंधन

सोयाबीन की निराई-गुडाई और उस पर खरपतवारों का नियंत्रण हमारे किसान भाई किस प्रकार करे?
सोयाबीन के खेत को निराई-गुडाई करके खरपतवारों से मुक्त रखना चाहिए। पहली बुवाई के 25 दिन बाद दूसरी 45 दिन बाद निराई-गुडाई करनी चाहिए ।  रसायनों का प्रयोग करने के लिए इसकी बुवाई से पहले 24 घंटे के अन्दर फ्लुक्लोरेफिलीन 45 ई.सी. 2.25 लीटर मात्रा को 700 से 800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिडकाव करके भूमि में मिला देना चाहिए या सोयाबीन की बुवाई के तुरंत बाद एलाक्लोर 50 ई.सी. 4 लीटर अथवा मेटोलाक्लोर 50 ई.सी. 2 लीटर को 700 से 800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिडकाव करना चाहिए इससे खरपतवारों का जमाव नहीं होता है।

रोग प्रबंधन

कौन-कौन से रोग लगते है सोयाबीन की फसल में रोगों पर नियंत्रण हम किस तरह से स्थापित करे किसान भाईयो को बताईये?
सोयाबीन में पीला चित्रवर्ण रोग तथा सुत्रक्रमि रोग लगते है। चित्रवर्ण को नियंत्रण हेतु रोग रोधी प्रजातियों की बुवाई करनी चाहिए रोगी पौधों को उखाड़ देना चाहिए या मिथायल ऒ डिमेटान 25 ई.सी 1.25 लीटर 1000 लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव करना चाहिए या डाईमिथोयेट 30 ई.सी 1 लीटर प्रति हेक्टेयर छिडकाव 1000 लीटर पानी के साथ करना चाहिए। सुत्रक्रमि के नियंत्रण हेतु 10 किलोग्राम फोरेट 10 जी. बुवाई के पूर्व प्रयोग करे अथवा नीम की खाली 15 से 20 कुंतल प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करना चाहिए।

कीट प्रबंधन

सोयाबीन की फसल में कौन-कौन से कीट लगने की संभावना होती है और उन पर हम किस तरह से नियंत्रण स्थापित करे?
सोयाबीन में कई तरह के कीट लगते है जैसे की फली छेदक कीट, ग्रीन सेमीलूप कीट, बिहार सेमी सूंडी, गार्डन बीटल आदि लगते है। इनके नियंत्रण हेतु अवरोधी प्रजातियों को प्रयोग करना चाहिए। रसायनों का प्रयोग करना चाहिए जैसे की क्लोरपयारिफोस 20 ई.सी. 1.5 लीटर या क्युनालफास 25 ई.सी. 1.5 लीटर प्रति हेक्टेयर 1000 लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव करना चाहिए इससे कीटों का नियंत्रण होता है।

फसल कटाई

सोयाबीन की फसल में कटाई और मड़ाई का सही समय क्या है, कैसे करनी चाहिए?
सोयाबीन की फलियाँ पककर पूरी तरह से पौधा सहित सूख जावे तभी कटाई करनी चाहिए। इसके पश्चात भी खेत में ही दो-तीन दिन डालकर सूखने पर मड़ाई करनी चाहिए।

पैदावार

सोयाबीन की फसल में लगभग प्रति हेक्टेयर कितनी उपज प्राप्त होने की संभावना होती है?

सामान्य रूप से 25 से 30 कुंतल प्रति हेक्टेयर उपज प्राप्त होती है लेकिन कुछ ऐसी भी प्रजातियाँ है जिनकी उपज अधिक भी प्राप्त होती है जैसे की पी.के. 472, 416 एवम पी.एस.1024 व् 1042 की पैदावार 30 से 35 कुंतल प्रति हेक्टेयर प्राप्त हो सकती है।

1

1

Recent Post

1