Latest News

728*90
1 लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
1 लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सरसों की खेती

परिचय

सरसों का रबी की तिलहनी फसलो में एक प्रमुख स्थान है, सरसों की खेती सीमित सिचाई की दशा में भी अधिक लाभदायक फसल है, सरसों की फसल के लिए उन्नत विधियाँ अपनाने से उत्पादन एवं उत्पादकता में बहुत ही वृद्धि होती हैI

प्रजातियाँ

सरसों की उन्नतशील प्रजातियाँ कौन कौन सी हैं ?
राई या सरसों के लिए बोई जाने वाली उन्नतशील प्रजातियाँ जैसे क्रांति, माया, वरुणा, इसे हम टी-59 भी कहते है, पूसा बोल्ड, उर्वशी, तथा नरेन्द्र राई, प्रजातियाँ की बुवाई सिंचित दशा में की जाती है तथा असिंचित दशा में बोई जाने वाली सरसों कीप्रजातियाँ जैसे की वरुणा, वैभव तथा वरदान, इत्यादि प्रजातियाँ को बवाई करना चाहिएI

उपयुक्त भूमि

सरसों की खेती के लिए किस प्रकार की जलवायु और भूमि की आवश्यकता होती है?
सरसों की फसल के लिए 25 से 30 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान होना चाहिए, सरसों की फसल के लिए दोमट भूमि सर्वोतम होती है, जिसमे की जल निकास उचित प्रबन्ध होना चाहिएI

खेत की तैयारी

सरसों की खेती के लिए हम भूमि की तैयारी किस तरह से करें?
सरसों की खेती के लिए खेत की तैयारी सबसे पहले मिट्टी पलटने वाले हल से जुताई करनी चाहिए, इसके पश्चात दो से तीन जुताईयाँ देशी हल या कल्टीवेटर से करना चाहिए, इसकी जुताई करने के पश्चात पाटा लगा कर खेत को समतल करना अति आवश्यक हैंI

बीज बुवाई

सरसों की बीज दर प्रति हैक्टर कितनी मात्रा में होनी चाहिए?
सिंचित क्षेत्रो में सरसों की फसल की बुवाई के लिए 5 से 6 किलोग्राम बीज प्रति हैक्टर के दर से प्रयोग करना चाहिएI
सरसों के बीज की बुवाई से पूर्व बीजो का शोधन किस तरह से करें?
सरसों की फसल के लिए बीज जनित रोगों की सुरक्षा हेतु 2 से 5 ग्राम थीरम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करके बोना चाहिएI
सरसों के बीज की बुवाई के लिए उपयुक्त समय क्या है, यह कैसे निर्धारित करें?
सरसों की बुवाई का उपयुक्त समय सितम्बर के अंतिम सप्ताह से अक्टूबर के प्रथम सप्ताह तक है, सरसों की बुवाई देशी हल के पीछे 5 से 6 सेंटी मीटर गहरे कूडो में 45 सेंटी मीटर की दूरी पर  करना चाहिएI

जल प्रबंधन

सरसों की फसल में सिचाई का सही समय क्या है?
सरसों की फसल में पहली सिचाई फूल आने के समय तथा दूसरी सिचाई फलियाँ में दाने भरने की अवस्था में करना चाहिए, यदि जाड़े में वर्षा हो जाती है, तो दूसरी सिचाई न भी करें तो उपज अच्छी प्राप्त हो जाती हैI

पोषण प्रबंधन

सरसों की फसल में खाद और उर्वरको का प्रयोग हमे कब करना चाहिए, और कैसे करना चाहिए?
सरसों की खेती के लिए 60 कुन्तल गोबर की सड़ी हुई खाद को बुवाई से पूर्व अंतिम जुताई के समय खेत में मिला देना चाहिए तथा सिंचित दशा में 120 किलोग्राम  नत्रजन, 60 किलोग्राम फास्फोरस तथा 60 किलोग्राम पोटाश तत्व के रूप में प्रति हैक्टर की दर से प्रयोग करते हैं, नाइट्रोजन की आधी मात्रा, फास्फोरस तथा पोटाश की पूरी मात्रा बुवाई से पहले, अंतिम जुताई के समय खेत में मिला देना चाहिए, शेष आधी नाइट्रोजन की मात्रा बुवाई के 25 से 30 दिन बाद टापड्रेसिग रूप में प्रयोग करना चाहिएI

खरपतवार प्रबंधन

खरपतवार का नियत्रण सरसों की फसल में हम कैसे करें?
सरसों की खेती में बुवाई के 15 से 20 दिन बाद घने पौधों को निकाल कर उनकी आपसी दूरी 15 सेन्टीमीटर कर देनी चाहिए, खरपतवार नष्ट करने के लिए एक निराई गुड़ाई सिचाई के पहले और दूसरी सिचाई के बाद करें, रसायन द्वारा खरपतवार नियंत्रण के लिए पेंडामेथालिन 30 ई.सी. रसायन की 3.3 लीटर मात्रा को प्रति हैक्टर की दर से 800 से 1000 लीटर पानी में घोल कर छिडकाव करना चाहिए, बुवाई के 2-3 दिन अंतर पर यह छिडकाव करना अति आवश्यक हैI

रोग प्रबंधन

 सरसों की फसल में लगने वाले रोगों का नियंत्रण किस तरह से करें?
सरसों की फसल में प्रमुख रोग जैसे आल्टरनेरिया, पत्ती झुलसा रोग, सफ़ेद किट्ट रोग, चूणिल आसिता रोग तथा तुलासिता रोग फसल में लगते है, इन रोगों के नियत्रण के लिए मेन्कोजेब 75 प्रतिशत नामक रसायन को 800-1000 लीटर पानी में मिलकर छिडकाव करना चाहिएI

कीट प्रबंधन

सरसों की फसल में कीट लग जाते है, उनकी रोकथाम किस तरह से करें?
सरसों में कीट अलग अलग तरह के होते -
सरसों की आरा मक्खी यह काले रंग की घरेलु मक्खी से छोटी होती है, मादा का अंडा रोपण आरी के आकार का होने के कारण इसे आरा मक्खी कहते हैं, इस कीट की सुड़ियाँ पत्तियों के किनारे पर छेद बनती है और बहुत तेजी से खाती है, इसके नियत्रण के लिए मैलाथियान 50 ई.सी. 1.5 लीटर को 700 से 800 लीटर पानी में घोल कर छिडकाव करना चाहिएI
चित्रित कीट इस कीट के प्रौढ़ तथा शिशु अपने चूसने वाले मुखंगो को पौधों की कोमल पत्तियों, शाखाओ, फूलो, तनो, तथा फलियों के रस चूसते है, इसका आक्रमण अक्टूबर से फसल कटने तक कभी भी हो सकता है, इसके नियंत्रण के लिए डाईमेथोएट 30 ई.सी. 1 लीटर या फेंटोथियान 50 ई.सी. 1.5 लीटर मात्रा को 700 से 800 लीटर पानी में घोल कर छिडकाव करना चाहिएI
माहू की सबसे बड़ी समस्या है, यह पंखहीन तथा पंख युक्त हल्के सिलेटी या हरे रंग का कीट होता है, इस कीट के प्रौढ़ तथा शिशु पौधों के कोमल तनो, पत्तियों, फूलो एवम नयी फलियों के रस चूसते है, इस कीट का प्रकोप दिसंबर से मार्च तक रहता है, इसके नियंत्रण के लिए डाईमेथोएट 30 ई.सी. 1 लीटर फेंटोथियान 50 ई.सी. 1 लीटर मात्रा को 700 से 800 लीटर पानी में घोलकर छिडकाव करना अति आवश्यक हैंI

फसल कटाई

सरसों की फसल की कटाई का उपयुक्त समय क्या है और इसका भण्डारण किस तरह से करें?
सरसों की फसल में जब 75% फलियाँ सुनहरे रंग की हो जाए, तब फसल को काटकर, सुखाकर या मड़ाई करके बीज अलग कर लेना चाहिए, सरसों के बीज को अच्छी तरह सुखाकर ही भण्डारण करना चाहिएI

पैदावार

सरसों की फसल से प्रति हैक्टर कितनी उपज प्राप्त कर सकते हैं?

असिंचित क्षेत्रो में इसकी पैदावार 20 से 25 कुन्तल तक तथा सिंचित क्षेत्रो में 25 से 30 कुन्तल प्रति हैक्टर तक प्राप्त हो जाती हैंI

आम की खेती

परिचय

आम की खेती लगभग पूरे देश में की जाती है। यह मनुष्य का बहुत ही प्रीय फल मन जाता है इसमे खटास लिए हुए मिठास पाई जाती है। जो की अलग अलग प्रजातियों के मुताबिक फलो में कम ज्यादा मिठास पायी जाती है। कच्चे आम से चटनी आचार अनेक प्रकार के पेय के रूप में प्रयोग किया जाता है। इससे जैली जैम सीरप आदि बनाये जाते है। यह विटामीन व् बी का अच्छा श्रोत है।

जलवायु और भूमि

आम की खेती के लिए किस प्रकार की जलवायु और भूमि की आवश्यकता होती है?
आम की खेती उष्ण एव समशीतोष्ण दोनों प्रकार की जलवायु में की जाती है। आम की खेती समुद्र तल से 600 मीटर की ऊँचाई तक सफलता पूर्वक होती है इसके लिए 23.8 से 26.6 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान अति उतम होता हैई आम की खेती प्रत्येक किस्म की भूमि में की जा सकती है। परन्तु अधिक बलुई, पथरीली, क्षारीय तथा जल भराव वाली भूमि में इसे उगाना लाभकारी नहीं है, तथा अच्छे जल निकास वाली दोमट भूमि सवोत्तम मानी जाती है।

प्रजातियाँ

आम के पेड़ लगाने से पहले वो कौन-कौन सी उन्नतशील प्रजातियाँ है?
हमारे देश में उगाई जाने वाली किस्मो में, दशहरी, लगडा, चौसा, फजरी, बाम्बे ग्रीन, अलफांसो, तोतापरी, हिमसागर, किशनभोग, नीलम, सुवर्णरेखा,वनराज आदि प्रमुख उन्नतशील प्रजातियाँ है। आम की नयी उकसित किस्मों में मल्लिका, आम्रपाली, दशहरी-, दशहरी-५१, अम्बिका, गौरव, राजीव, सौरव, रामकेला, तथा रत्ना प्रमुख प्रजातियां हैं

खेत की तैयारी

आम की फसल तैयार करने के लिए गढ्ढ़ो की तैयारी किस तरह से करे और वृक्षों का रोपण करते समय किस तरह की सावधानी बरते?
वर्षाकाल आम के पेड़ो को लगाने के लिए सारे देश में उपयुक्त माना गया है। जिन क्षेत्रो में वर्षा आधिक होती है वहां वर्षा के अन्त में आम का बाग लगाना चाहिए। लगभग 50 सेन्टीमीटर व्यास एक मीटर गहरे गढ्ढे मई माह में खोद कर उनमे लगभग 30 से 40 किलो ग्राम प्रति गड्ढा सड़ी गोबर की खाद मिटटी में मिलाकर और 100 ग्राम क्लोरोपाइरिफास पावडर बुरककर गड्ढो को भर देना चाहिए। पौधों की किस्म के अनुसार 10 से 12 मीटर पौध से पौध की दूरी होनी चाहिए, परन्तु आम्रपाली किस्म के लिए यह दूरी 2.5 मीटर ही होनी चाहिए।

बीजारोपण

आम की फसल में प्रवर्धन या प्रोपोगेशन किन- किन विधियो दवारा किया जा सकता है?
आम के बीजू पौधे तैयार करने के लिए आम की गुठलियों को जून-जुलाई में बुवाई कर दी जाती है आम की प्रवर्धन की विधियों में भेट कलम, विनियर, साफ्टवुड ग्राफ्टिंग, प्रांकुर कलम, तथा बडिंग प्रमुख है, विनियर एवम साफ्टवुड ग्राफ्टिंग द्वारा अच्छे किस्म के पौधे कम समय में तैयार कर लिए जाते है।

पोषण प्रबंधन

आम की फसल में खाद एवं उर्वरक का प्रयोग कब करना चाहिए ?
बागो की दस साल की उम्र तक प्रतिवर्ष उम्र के गुणांक में नाइट्रोजन, पोटाश तथा फास्फोरस प्रत्येक को १०० ग्राम प्रति पेड़ जुलाई में पेड़ के चारो तरफ बनायीं गयी नाली में देनी चाहिए। इसके अतिरिक्त मृदा की भौतिक एवं रासायनिक दशा में सुधार हेतु 25 से 30 किलोग्राम गोबर की सड़ी खाद प्रति पौधा देना उचित पाया गया है। जैविक खाद हेतु जुलाई-अगस्त में 250 ग्राम एजोसपाइरिलम को 40 किलोग्राम गोबर की खाद के साथ मिलाकर थालो में डालने से उत्पादन में वृदि पाई गयी है।

जल प्रबंधन

आम की फसल सिचाई हमें कब करनी चाहिए, और किस प्रकार करनी चाहिए?
आम की फसल के लिए बाग़ लगाने के प्रथम वर्ष सिचाई 2-3 दिन के अन्तराल पर आवश्यकतानुसार करनी चाहिए 2 से 5 वर्ष पर 4-5 दिन के अन्तराल पर आवश्यकताअनुसार करनी चहिये। तथा जब पेड़ो में फल लगने लगे तो दो तीन सिचाई करनी अति आवश्यक है। आम के बागो में पहली सिचाई फल लगने के पश्चात दूसरी सिचाई फलो का काँच की गोली के बराबर अवस्था में तथा तीसरी सिचाई फलो की पूरी बढवार होने पर करनी चाहिए। सिचाई नालियों द्वारा थालो में ही करनी चाहिए जिससे की पानी की बचत हो सके।

खरपतवार प्रबंधन

आम की फसल में निराई गुड़ाई और खरपतवारो का नियंत्रण हमारे किसान भाई किस प्रकार करे?
आम के बाग को साफ रखने के लिए निराई गुड़ाई तथा बागो में वर्ष में दो बार जुताई कर देना चाहिए इससे खरपतवार तथा भूमिगत कीट नष्ट हो जाते है इसके साथ ही साथ समय समय पर घास निकलते रहना चाहिए।

रोग प्रबंधन

आम की फसल में कौन कौन से रोग लगते है और उसका नियंत्रण हम किस प्रकार करे?
आम के रोगों का प्रबन्धन कई प्रकार से करते है। जैसे की पहला आम के बाग में पावडरी मिल्ड्यू यह एक बीमारी लगती है इसी प्रकार से खर्रा या दहिया रोग भी लगता है इनसे बचाने के लिए घुलनशील गंधक 2 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में या ट्राईमार्फ़ 1 मिली प्रति लीटर पानी या डाईनोकैप 1 मिली प्रति लीटर पानी घोलकर प्रथम छिडकाव बौर आने के तुरन्त बाद दूसरा छिडकाव 10 से 15 दिन बाद तथा तीसरा छिडकाव उसके 10 से 15 दिन बाद करना चाहिए आम की फसल को एन्थ्रक्नोज फोमा ब्लाइट डाईबैक तथा रेडरस्ट से बचाव के लिए कापर आक्सीक्लोराईड 3 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में घोलकर 15 दिन के अन्तरालपर वर्षा ऋतु प्रारंभ होने पर दो छिडकाव तथा अक्टूबर-नवम्वर में 2-3 छिडकाव करना चाहिए। जिससे की हमारे आम के बौर आने में कोइ परेशानी हो। इसी प्रकार से आम में गुम्मा विकार या माल्फर्मेशन भी बीमारी लगती है इसके उपचार के लिए कम प्रकोप वाले आम के बागो में जनवरी फरवरी माह में बौर को तोड़ दे एवम अधिक प्रकोप होने पर एन... 200 पी. पी. एम्. रसायन की 900 मिली प्रति 200 लीटर पानी घोलकर छिडकाव करना चहिये। इसके साथ ही साथ आम के बागो में कोयलिया रोग भी लगता है। जिसको की किसान भाई सभी आप लोग जानते है इसके नियंत्रण के लिए बोरेक्स या कास्टिक सोडा 10 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर प्रथम छिडकाव फल लगने पर तथा दूसरा छिडकाव 15 दिन के अंतराल पर करना चाहिए जिससे की कोयलिया रोग से हमारे फल ख़राब हो सके।

कीट प्रबंधन

कौन - कौन से कीट है, जो आम में लगते है, और उनका नियंत्रण किस प्रकार होना चाहिए?
आम में भुनगा फुदका कीट, गुझिया कीट, आम के छल खाने वाली सुंडी तथा तना भेदक कीट, आम में डासी मक्खी ये कीट है। आम की फसल को फुदका कीट से बचाव के लिए एमिडाक्लोरपिड 0.3 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोलकर प्रथम छिडकाव फूल खिलने से पहले करते है। दूसरा छिडकाव जब फल मटर के दाने के बराबर हो जाये, तब कार्बरिल 4 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलकर छिडकाव करना चाहिए। इसी प्रकार से आम की फसल को गुझिया कीट से बचाव के लिए दिसंबर माह के प्रथम सप्ताह में आम के तने के चारो ऒर गहरी जुताई करे, तथा क्लोरोपईरीफ़ास चूर्ण 200 ग्राम प्रति पेड़ तने के चारो बुरक दे, यदि कीट पेड़ पर चढ़ गए हो तो एमिडाक्लोरपिड 0.3 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोलकर जनवरी माह में 2 छिडकाव 15 दिन के अंतराल पर करना चाहिए तथा आम के छाल खाने वाली सुंडी तथा तना भेदक कीट के नियंत्रण के लिए मोनोक्रोटोफास 0.5 प्रतिशत रसायन के घोल में रूई को भिगोकर तने में किये गए छेद में डालकर छेद बंद कर देना चाहिए। एस प्रकार से ये सुंडी ख़त्म हो जाती है। आम की डासी मक्खी के नियंत्रण के लिए मिथाईलयूजीनाल ट्रैप का प्रयोग प्लाई लकड़ी के टुकडे को अल्कोहल मिथाईल एवम मैलाथियान के छः अनुपात चार अनुपात एक के अनुपात में घोल में 48 घंटे डुबोने के पश्चात पेड़ पर लटकाए ट्रैप मई के प्रथम सप्ताह में लटका दे तथा ट्रैप को दो माह बाद बदल दे।

फसल कटाई

आम की फसल की तुड़ाई कब करनी चाहिए और किस प्रकार करनी चाहिए?
आम की परिपक्व फलो की तुड़ाई 8 से 10 मिमी लम्बी डंठल के साथ करनी चाहिए, जिससे फलो पर स्टेम राट बीमारी लगने का खतरा नहीं रहता है। तुड़ाई के समय फलो को चोट व् खरोच लगने दें, तथा मिटटी के सम्पर्क से बचाये। आम के फलो का श्रेणीक्रम उनकी प्रजाति, आकार, भार, रंग परिपक्ता के आधार पर करना चाहिए।

पैदावार

आम की फसल से औसतन उपज कितनी प्राप्त कर सकते है?

रोगों एवं कीटो के पूरे प्रबंधन पर प्रति पेड़ लगभग 150 किलोग्राम से 200 किलोग्राम तक उपज प्राप्त हो सकती है। लेकिन प्रजातियों के आधार पर यह पैदावार अलग-अलग पाई गयी है।

1

1

Recent Post

1